विकसित भारत अमन विश्वकर्मा और भारतीय संविधान पर नियामत अली का हुआ भाषण
सोनभद्र में 22 मार्च को क्षेत्रीय प्रतियोगिता में दोनों छात्रों ने भाषण प्रतियोगिता में दिखाया परमच
नियामत अली सकलडीहा पीजी कॉलेज का छात्र विधान सभा में भाषण देते हुए
सकलडीहा।उत्तर प्रदेश के विधान सभा भवन में जहां मंत्री और विधायक अपनी बाते रखते है। वही बीते 28 और 29 मार्च को विधान सभा में भाषण प्रतियोगिता में सकलडीहा पीजी कॉलेज के छात्र नियामत अली और अमन विश्वकर्मा भारतीय संविधान और विकसीत भारत पर भाषण देकर सबकों चौका दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने विधान सभा में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने पर पुरस्कृत करने की घोषणा किया है। वही महाविद्यालय के छात्र छात्रा सहित शिक्षकों ने दोनों छात्रों को ओजस्वी भाषण देने बधाई दिया है।
रोवर्स और रेंजर्स के प्रभारी प्रोफेसर विजेंदर सिंह और डॉक्टर प्रीतम उपाध्याय की देख रेख में बीते 22 मार्च को क्षेत्रीय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन सोनभ्रद में किया गया था। जिसमें सकलडीहा पीजी कॉलेज के नियामत अली और अमन विश्वकर्मा ने प्रतिभाग किया था। अपनी कड़ी मेहनत और ओजस्वी भाषण से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। जिसके बाद उनका चयन लखनऊ के विधान सभा में होने वाली भाषण प्रतियोगिता में हुआ। दो दिवसीय 28 और 29 मार्च को भाषण प्रतियोगता में नियामत अली ने भारतीय संविधान पर विस्तार से चर्चा करते हुए ओजस्वी ढ़्रग से भारतीय संविधान की चर्चा किया। वही अमन विश्वकर्मा ने विकसीत भारत पर देश की तमाम विकास और कोरोना काल का जिक्र करते हुए विकसीत भारत की परिकल्पना पर सबकों मंत्र मुग्ध कर दिया। दोनों छात्रों को भाषण प्रतियोगिता में सफल प्रतिभाग करने पर रोवर्स रेजर्स डा.विजेन्द्रर सिंह और डा.प्रीतम मिश्रा ने उत्साहवर्धन किया । प्राचार्य प्रोफेसर प्रदीप कुमार पांडेय ने जहां मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और विधायक सहित विपक्ष के नेता विधान सभा में अपने क्षेत्र की आवाज उठाते है। महाविद्यालय के दो छात्रों ने विधान सभा में पहुंचकर जिले की गरिमा को बढ़ाया है। दोनों छात्रों के लिए पुरस्कार की घोषणा की। प्राचार्य ने बताया कि आकांक्षी जनपद चंदौली का यह गरिमामय शिक्षण संस्थान क्षेत्र के होनहार नौजवानों के लिए सदैव आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है। जिससे महाविद्यालय खेलकूद एवं बौद्धिक क्षमता के साथ शिक्षा का नया किर्तिमान स्थापित करता है। जिसका श्रेय महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक को एवं कर्मचारियों के साथ-साथ उनकी माता-पिता को जाता है।
