आस्था
अभेद आश्रम से डोली निकालते हुए भक्तजन
सकलडीहा। टिमिलपुर स्थित अभेद आश्रम में वांसतिक नवरात्रि पर विधि विधान से पूजा अर्चना किया गया। आश्रम में आये दूर दराज से आये नौ दिन के व्रती श्रद्धालुओं ने साफ सफाइ्र कर श्रमदान किया। इसके बाद सफलयोनि का पाठ और देर रात तक भजन कीर्तन प्रसाद वितरण किया गया।
अभेद आश्रम में विधि विधान से मां के नव रूपों की पूजा किया गया। इसके बाद देर रात में माँ कालरात्रि की निकाली गई डोली झांकी। इस दौरान आश्रम के संत श्रीचंद्र शेखर साधु जी ने बताया कि इस दिन मां कालरात्रि की पूजा,अर्चना किया जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। और इस पूजन से शत्रुओं का भी नाश हो जाता है। माता कालरात्रि का रंग काला होने के कारण इन्हें कालरात्रि कहा गया है। कालरात्रि को काली का ही रूप माना जाता है।आज के वर्तमान समय मे माँ काली इस कलियुग मे प्रत्यक्ष फल देने वाली माता हैं। माँ काली को अनन्त नाम व रूप से जाना जाता हैं। जैसे माँ भद्रकाली, दक्षिण काली, मातृ काली व महाकाली भी कहा जाता है। इस मौके पर भक्त अमित कुमार,सुभाष चौहान,कमला चौधरी,बीरेंद्र चौधरी,गीता सिंह,संजय सिंह,जेपी,टोनु चौधरी,दिवेन्द्र सिंह,भानु,माला श्रीवास्तव, अनिमेष श्रीवास्तव, सहित अन्य भक्त मौजूद रहे।
