साहित्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र का अहम योगदान
सकलडीहा पीजी कॉलेज में जयंती समारोह पर विचार गोष्ठी का आयोजन
सकलडीहा पीजी कॉलेज में गोष्ठी को संबोधित करते प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय, उपस्थित शिक्षक व छात्र।।
सकलडीहा। सकलडीहा पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जयंती पर गुरुवार को विचार गोष्ठी एवं जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के साहित्यिक अवदान, हिंदी भाषा के विकास तथा आधुनिक हिंदी साहित्य के निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. प्रदीप कुमार पाण्डेय ने कहा कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने हिंदी साहित्य को आधुनिक चेतना प्रदान करने के साथ ही समाज और राष्ट्र के प्रति साहित्यकार की जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुंचाने और साहित्य को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका साहित्य आज भी समाज को जागरूक करने और नई दिशा देने का कार्य करता है।
उप प्राचार्य प्रो. दयानिधि सिंह यादव ने कहा कि भारतेन्दु के साहित्य में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक जागरूकता और जनहित की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। बदलते सामाजिक परिवेश में भी उनकी रचनाएं प्रासंगिक हैं और युवा पीढ़ी को समाज व राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराती हैं।
यज्ञनाथ पाण्डेय ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के रचनाकर्म पर विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को हिंदी नवजागरण का आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारतेन्दु ने हिंदी साहित्य को नई दिशा और नई दृष्टि प्रदान की। आधुनिक हिंदी के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
गोष्ठी में शिक्षकों ने भारतेन्दु के साहित्य और उनके विचारों पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों से उनके रचनाकर्म का अध्ययन करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं हिंदी विभाग के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।