हरतालिका तीज पर प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में उमड़ी आस्था
व्रती महिलाओं ने सुनी शिव-पार्वती की कथा, हवन में दी आहुति
सकलडीहा प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में पूजा-अर्चना करतीं व्रती महिलाएं।
सकलडीहा। हरतालिका तीज के पावन पर्व पर सोमवार को सकलडीहा कस्बा स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। सुबह से ही व्रती महिलाओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। महिलाओं ने विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान व्रती महिलाओं ने हरतालिका तीज की कथा सुनी। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन कराया गया। महिलाओं ने हवन कुंड में आहुति देकर परिवार के सुख-शांति और मंगल की कामना की। मंदिर के पुजारी विनीत चंद्र पांडेय ने विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ कथा, पूजन एवं हवन संपन्न कराया।इस दौरान पूनम देवी,पुष्पा देवी,बन्दना देवी,रूबी,सुनीता,रीता,गीता,मंजू देवी,गायत्री देवी,सीमा देवी,ममता देवी सहित बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं मौजूद रहीं। पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर प्रसाद अर्पित किया और आशीर्वाद लिया। हवन के दौरान मंदिर परिसर मंत्रोच्चार और जयकारों से गूंज उठा।पुजारी विनीत चंद्र पांडेय ने बताया कि हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट दांपत्य प्रेम और समर्पण का पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी आस्था के साथ महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं।पर्व को लेकर प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा। पूजा-अर्चना के बाद व्रती महिलाओं ने एक-दूसरे को तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। पूरे मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की मनोहारी छटा देखने को मिली।इस दौरान शिव मंदिर पुजारी,दिलीप मिश्रा,रामजनम चौबे,सहित अन्य मौजूद रहे।






